अवैध खुदाई का खुला खेल, आदेशों की फाइलों में दफन कार्रवाई तहसीलदार-SDM की चुप्पी पर सवाल
22 Jan, 2026
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नायक दर्पण/किरनापुर।
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तहसील क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राजस्व और वन विभाग की मिलीभगत से क्षेत्र में अवैध उत्खनन और ईंट भट्टों का काला कारोबार अपने चरम पर है। सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में पंचनामे महीनों तक कार्यालयों में लंबित पड़े रहते हैं, जिससे अवैध खुदाई करने वालों और अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई न होने के कारण सरकारी भूमि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पटवारी की नजर और तहसीलदार की खामोशी
क्षेत्र के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पटवारी को एक-एक इंच जमीन की जानकारी होती है, लेकिन अवैध खुदाई वाली जगहों पर पटवारी का न पहुँचना बड़ी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। वहीं तहसीलदार कार्यालय से चंद दूरी पर चल रहे इन भट्टों और उड़ती धूल के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राजस्व विभाग का यह कहना कि हमें कुछ पता नहीं जनता के गले नहीं उतर रहा।
वन विभाग की जमीन पर भी डाका अवैध खुदाई का यह खेल अब सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं रहा बल्कि वन विभाग की सीमाओं में भी सेंधमारी की जा रही है। वन रक्षकों और बीट गार्डों की मौजूदगी के बावजूद वन क्षेत्र से लगी जमीनों पर जेसीबी मशीनें गरजना वन विभाग की निष्क्रियता को उजागर करता है। हरे-भरे क्षेत्र अब ईंट भट्टों की राख और गहरे गड्ढों में तब्दील हो रहे हैं।
फॉरेस्ट विभाग,पटवारी, तहसीलदार फाइलों को ठंडे बस्ते।
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अवैध खुदाई की लोकेशन चिह्नित करवाकर रिपोर्ट दबा देते हैं। अपनी सीमा में हो रहे अतिक्रमण और खुदाई को अनदेखा करता है। फॉरेस्ट विभाग की बात करे तो अपने हि बिट क्रमांक में आराम फार्मा रहे है ,जब इन्हे जंगल हों जंगली जानवरो हत्या करने साजिस की जानकरी हों गूंगे बन जाते है वही अपने सेटिंग करने में लग जाते है।कहा जाता है की जंगलो से अवैध खुदाई करने हप्ता या कमीशन मांगे जाने की जानकारी लगी है , जिसके वजह से हौसला बुलंद कारोबारीयो के हों चुके है। हलाकि हम नही कहते यह तो जन चर्चा का विषय बना चुका है। यहां तक कि कुछ पटवारियों ने नाम न छापने की शर्त पर मौखिक रूप से जानकारी दी कि राजस्व क्षेत्र में होने वाले सभी अवैध खुदाई कार्य या अवैध अतिक्रमण के मामलों में पटवारियों द्वारा पंचनामा बनाकर तहसील कार्यालय में भेज दिया जाता है। परंतु इन मामलों में वास्तविक कार्रवाई तहसीलदार मैडम एवं एसडीएम साहब के आदेशों के बाद ही की जाती है। नाक के नीचे हो रहा जलता हुआ भट्टों का कारोबार,करोड़ों के राजस्व का चूना। बिना किसी रॉयल्टी, बिना प्रदूषण एनओसी और बिना वैध लीज के चल रहे ये ईंट भट्टे न केवल पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी करोड़ों की चपत लगा रहे हैं। वन विभाग भी नहीं दे रहा है गुणवत्ता हीन ईट का किया जा रहा है निर्माण कुछ ईट भट्टे भूमि स्वामी पर चल रहे है । राजस्व की भूमि पर चल रहे हैं । वन विभाग की भूमि पर चल रहे हैं तालाब व नदियों का पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे जलस्तर घटते जा रहा है यदि मामला जमीनी स्तर पर देखें तो अवैध ईट भट्टों का कारोबार विभागीय अधिकारी कर्मचारियों ईट भट्टा व्यापारियों के सांठगांठ से चलता प्रतीत होता है क्षेत्र में गहरे कुएं नुमा गड्ढे हादसों को न्यौता दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन लंबित मामलों पर कब तक संज्ञान लेते हैं और राजस्व नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कब सख्त कार्रवाई की जाती है।
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