भ्रष्टाचार का खुला खेल: सचिव साहब ने भाई को बनाया 'ठेकेदार', सरकारी खजाने पर मारा डाका! नियमों को ठेंगा दिखाकर चहेतों की झोली में डाले लाखों रुपये, वित्तीय गबन का सनसनीखेज मामला आया सामने।

31 Oct, 2026 5 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सरकारी तंत्र किस कदर दीमक की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है, इसकी बानगी जनपद पंचायत किरनापुर की ग्राम पंचायत बेलगांव में साफ तौर पर देखी जा सकती है। यहां पदस्थ भ्रष्ट पंचायत सचिव कैलाश गजभिए ने सरकारी खजाने को अपनी निजी तिजोरी समझ लिया है। जनता के विकास के लिए आने वाले लाखों रुपयों को इस शातिर सचिव ने अपने भाई की जेब में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पंचायती राज के नियमों का चीरहरण कर खुलेआम किए जा रहे इस वित्तीय घोटाले ने सिस्टम के सीने पर मूंग दलने का काम किया है।

​भाई प्रेम में भूले कानून के पाठ, नियमों की उड़ाई धज्जियां

​पंचायती राज व्यवस्था का साफ और सख्त निर्देश है कि कोई भी सरपंच या सचिव अपने खून के रिश्तों, भाई या परिवार के सदस्यों को आर्थिक फायदा नहीं पहुंचा सकता। यह सीधा नियम है कि अपने किसी भी परिजन का बिल पंचायत में नहीं लगाया जा सकता। ​लेकिन बेलगांव पंचायत के सचिव कैलाश गजभिए ने इन तमाम वैधानिक नियमों को जूते की नोक पर रख दिया। जनाब ने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपने ही भाई के नाम से फर्जी और नियम विरुद्ध बिल तैयार किए और पंचायत के खातों से लाखों रुपये का अंधाधुंध आहरण कर लिया। क्या सरकारी नियम सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं या इन भ्रष्ट सचिव पर कानून का डंडा असर ही नहीं करता?

​मौदा से लेकर बेलगांव तक फैला है भ्रष्टाचार का जाल

​यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि कैलाश गजभिए के काले कारनामों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। ग्रामीणों की मानें तो जिस-जिस भी ग्राम पंचायत में सचिव कैलाश गजभिए की तैनाती रही है, वहां-वहां इसने सरकारी पैसों को दोनों हाथों से लूटा है। ​इससे पहले ग्राम पंचायत मौदा में पदस्थ रहने के दौरान भी इसी शातिर सचिव कैलाश गजभिए ने अपने भाई को ठेकेदार बनाकर लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया। क्षेत्र में सुगबुगाहट है कि गजभिए ने अपने पूरे सेवाकाल में जहां भी कदम रखे वहां सरकारी तिजोरी पर डाका डालने के अलावा और कोई काम नहीं किया। एक ही ढर्रे पर बिना किसी खौफ के हर पंचायत में अपने रिश्तेदारों के जरिए भ्रष्टाचार की गंगा बहाना इस बात का सुबूत है कि इस शातिर सचिव को किसी न किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का वरदान प्राप्त है।

​आखिर कब जागेगा प्रशासन,कब होगी कार्रवाई?

​हैरानी की बात तो यह है कि इतना बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। क्या जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के आला अधिकारी इस करप्ट सचिव के खिलाफ किसी बड़े आदेश का इंतजार कर रहे हैं? या फिर इस लूट में हिस्सेदारी का खेल पर्दे के पीछे चल रहा है?

​सीधी चेतावनी: बक्शा नहीं जाएगा भ्रष्टाचार का यह सौदागर

​बेलगांव और मौदा के आक्रोशित ग्रामीणों का अब सब्र का बांध टूट चुका है। जनता का सीधा कहना है कि यदि शासन और प्रशासन ने इस भ्रष्ट सचिव कैलाश गजभिए के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन, एफआईआर और भाई के नाम से निकाले गए एक-एक पाई की रिकवरी की कार्रवाई नहीं की तो जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।
देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद गहरी नींद से जागता है या फिर इन भ्रष्टों को बचाने की लीपापोती शुरू होती है।