दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के संपादक शमीम खान बाल-बाल बचे नकाबपोश युवकों की करतूत से पत्रकारों में आक्रोश...!
04 Sep, 2026
105 व्यूज
सिवनी नायक दर्पण
जिले में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के संपादक शमीम खान पर दो अज्ञात नकाबपोश युवकों द्वारा कथित रूप से चाकू से हमला करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पत्रकारों में आक्रोश है और पुलिस से आरोपियों की जल्द पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
घटना 3 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे की बताई जा रही है। शमीम खान अपने पुत्र को स्कूल छोड़कर दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे। इसी दौरान मोपेड सवार दो नकाबपोश युवकों ने कथित तौर पर उनका पीछा करना शुरू कर दिया। बड़ी ज्यारत स्थित शिवहरे क्लीनिक के पास युवकों ने उनका वाहन रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पीछे बैठे युवक द्वारा चाकू निकालकर वार करने की कोशिश किए जाने का आरोप है।
हालांकि शमीम खान ने स्थिति को भांपते हुए वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और मौके से निकल गए। बताया जा रहा है कि दोनों युवक कुछ दूरी तक उनका पीछा करते रहे, लेकिन वे सुरक्षित बच निकलने में सफल रहे। घटना में यदि जरा भी चूक होती तो मामला गंभीर रूप ले सकता था।
घटना के बाद शमीम खान ने पुलिस अधीक्षक सिवनी को लिखित शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। शिकायत में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग के साथ ही बड़ी ज्यारत और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो नकाबपोश युवकों ने संपादक का पीछा क्यों किया? क्या यह अचानक हुई घटना थी या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित मंशा थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।
घटना ने जिले में पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। पत्रकारों का कहना है कि यदि समाचार प्रकाशित करने वाले संपादक को ही रास्ते में रोककर कथित रूप से चाकू से हमला करने का प्रयास किया जा सकता है, तो स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
यह मामला केवल एक पत्रकार की सुरक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों के निर्भीक होकर काम करने के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि हमले के पीछे कारण क्या था, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के जिला प्रभारी एवं फ्रीलांसर जर्नलिस्ट जितेन्द्र सिंह ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि संपादक पर हमला करने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। पुलिस को आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के साथ यह भी जांचना चाहिए कि घटना के पीछे किसी व्यक्ति या साजिश की भूमिका तो नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने और पत्रकार सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस के समक्ष शिकायत पहुंच चुकी है। अब निगाहें जांच पर हैं—क्या CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के जरिए नकाबपोश हमलावरों की पहचान हो पाएगी और इस कथित हमले के पीछे की असली वजह सामने आएगी?
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!