निजी स्कूल एसोसिएशन की बैठक में सुरक्षा और संगठन पर मंथन, पालकों के सवाल फिर दरकिनार... फीस, महंगी किताब-कॉपियां तय दुकानों की बाध्यता और भारी बस्तों के बोझ पर नहीं हुई चर्चा अभिभावकों में नाराजगी....!

31 Aug, 2026 155 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

निजी विद्यालयों के संचालकों की जिला स्तरीय बैठक रविवार को आशीर्वाद पैलेस, सिवनी में आयोजित हुई। बैठक में विद्यार्थियों की सुरक्षा, विद्यालय संचालन की गुणवत्ता, शिक्षकों के प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि, बैठक में बच्चों और अभिभावकों से सीधे जुड़े कई अहम सवालों पर चर्चा नहीं होने से पालकों में नाराजगी सामने आई है।
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की बैठकों में पालकों को शामिल नहीं किया जाता, जबकि स्कूल व्यवस्था का सबसे बड़ा आर्थिक और सामाजिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता है। उनका आरोप है कि अत्यधिक फीस, किताब-कॉपियों की कीमत, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और अन्य सामग्री के लिए निर्धारित दुकानों से खरीदारी की बाध्यता जैसे मुद्दे लगातार बने हुए हैं, लेकिन इन पर एसोसिएशन की बैठकों में कोई ठोस चर्चा नहीं होती।
बच्चों के भारी बस्ते का मुद्दा भी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। वहीं कई पालकों ने शिक्षकों की योग्यता और वेतन से जुड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ निजी विद्यालयों में कम वेतन के कारण पर्याप्त रूप से योग्य शिक्षकों के स्थान पर अपात्र शिक्षकों से अध्यापन कराया जा रहा है। खेलकूद और बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पालकों का कहना है कि कई विद्यालयों में खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त मैदान अथवा नियमित व्यवस्था नहीं है।
बैठक में एसोसिएशन की ओर से विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत अभिभावक को बच्चे को विद्यालय से ले जाते समय कार्ड प्रस्तुत करना होगा। विद्यालय शुरू होने के बाद विषम परिस्थितियों में अभिभावक से चर्चा के बाद ही विद्यार्थी को छुट्टी देने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा विद्यालयों के गुणवत्तापूर्ण संचालन के लिए आवश्यक मानकों पर प्रशिक्षण, निजी विद्यालयों की समस्याओं को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने, विकासखंड एवं जिला कार्यकारिणी के पुनर्गठन तथा भोपाल में प्रस्तावित 10 सूत्रीय मांगों के कार्यक्रम में जिले की सहभागिता सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
बैठक में जिलाध्यक्ष, कार्यकारी जिलाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव तथा प्रत्येक विकासखंड से तीन सदस्यों सहित 65 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी के गठन का निर्णय भी लिया गया। कार्यकारी जिलाध्यक्ष नरेश सिंह राजपूत ने सभी संचालकों से 7 सितंबर से पहले अपने-अपने विकासखंड में कार्यकारिणी गठित करने का आह्वान किया।
बैठक प्रदेश अध्यक्ष शैलेष तिवारी के मुख्य आतिथ्य एवं कार्यकारी जिलाध्यक्ष नरेश सिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुई। इसमें विधिक सलाहकार जनक तिवारी, कोषाध्यक्ष शिवकुमार हीरनखेड़े सहित जिले के आठों विकासखंडों के निजी विद्यालय संचालक उपस्थित रहे।
अब सवाल यह है कि जब बैठक में विद्यार्थियों की सुरक्षा और गुणवत्ता की बात होती है, तो उन बच्चों के अभिभावकों की आर्थिक परेशानियों, फीस, किताबों और अन्य खर्चों पर भी खुलकर चर्चा कब होगी? अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों में उनकी आवाज को भी स्थान मिलना चाहिए।