गड्ढों से सहमा बचपन सड़क पर उतरा जनआक्रोश...छात्रों ने जड़ा चक्काजाम...अफसरों की लापरवाही पर भड़का गुस्सा स्कूल ड्रेस में धरने पर बैठे नौनिहाल...प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूले...!
24 Aug, 2026
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सिवनी नायक दर्पण
खोखले वादों और दस सालों से बदहाली की मार झेल रही चारगांव-पिपरडाही सड़क का मुद्दा अब चिंगारी से शोला बन चुका है। जनप्रतिधियों की बेरुखी और प्रशासनिक नाकामी से आहत होकर सोमवार को एक शाला-एक परिसर' के स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी कॉपियां-किताबें छोड़ सिवनी-छिंदवाड़ा मुख्य मार्ग पर मोर्चा संभाल लिया। स्कूल यूनिफॉर्म में सड़क पर बैठे मासूमों और ग्रामीणों के तेवरों ने रफ्तार भरते हाईवे की पहियों पर ब्रेक लगा दिया।
कागजी दावों की उधड़ी परतें आक्रोश की प्रमुख वजहें...!
10 साल का वनवास- चारगांव से पिपरडाही मार्ग इस कदर जर्जर हो चुका है कि इस पर पैदल चलना भी हादसे को न्योता देना है। बारिश में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है।
खतरे के साए में पढ़ाई- सड़क ही नहीं, गांव का स्कूल भवन और पंचायत कार्यालय भी जर्जर हाल में हैं। डिस्मेंटल न किए जाने से मासूमों के सिर पर हादसों की तलवार लटक रही है।
जनप्रतिनिधियों का गायब मोड- जब पूरा गांव सड़क पर तड़प रहा था तब ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव नदारद रहे। ग्रामीणों ने पंचायत की इस संवेदनहीनता पर तीखा आक्रोश जताया।
अफसरों की दौड़ा-दौड़ी और लिखित मांग की शर्त.....!
जाम की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। लखनवाड़ा थाना प्रभारी सीके सीरामे, एसडीएम पूर्वी तिवारी, डीईओ अभिनाश दीक्षित और जनपद सीईओ लोकेश साहू दलबल के साथ पहुंचे। प्रदर्शनकारी छात्र और ग्रामीण सीधे कलेक्टर को मौके पर बुलाने और लिखित गारंटी पर अड़े रहे।
निरीक्षण का ड्रामा या ठोस समाधान....?
अधिकारियों की कड़ी समझाइश के बाद जैसे-तैसे प्रदर्शन स्थगित हुआ। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी कुछ छात्रों को अपनी गाड़ियों में बैठाकर बदहाल मार्ग का निरीक्षण करने पहुँचे। हालांकि जब जनपद सीईओ लोकेश साहू से इस अव्यवस्था पर तीखे सवाल पूछे गए तो वे जवाब देने के बजाय बगलें झांकते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की अनुपस्थिति को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी रही। ग्रामीणों का कहना था कि जब गांव के लोग वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हैं, तब पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों को मौके पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याएं सुननी चाहिए थीं।
ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि यह महज एक और कागजी आश्वासन निकला तो अगला आंदोलन आर-पार का होगा।
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