20 साल से जलाशय का इंतजार अब किसानों के सब्र का बांध टूटा...तीन माह में काम शुरू करो वरना होगा बड़ा आंदोलन...किसानों की एक ही आवाज—अब आश्वासन नहीं, खेतों तक पानी चाहिए...!

18 Aug, 2026 260 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

केवलारी विधानसभा क्षेत्र के उगली क्षेत्र के मसानेटोंग और सिवनी तहसील के लालमाटी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही सिंचाई समस्या अब किसानों के सब्र की परीक्षा बन गई है। किसानों ने शासन-प्रशासन से दो टूक कहा है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि खेतों तक पानी पहुंचाने की ठोस व्यवस्था चाहिए। किसानों ने दोनों क्षेत्रों में जलाशय निर्माण के साथ माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू करने की मांग उठाई है।

किसानों का कहना है कि बारिश के दौरान क्षेत्र में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है, लेकिन जल संरक्षण और सिंचाई की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से बरसात के बाद खेतों में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। किसान फसल तो बोते हैं, लेकिन सिंचाई सुविधा के अभाव में उत्पादन पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहता है।
किसानों का सवाल है कि जब क्षेत्र में बारिश का पानी और जलस्रोत मौजूद हैं, तो उसे संरक्षित कर खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?

किसान नेता आशीष भैरम ने कहा कि यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि किसान की मेहनत, फसल, आय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। किसानों ने शासन-प्रशासन को तीन माह की समय-सीमा दी है।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में सर्वे, डीपीआर, स्वीकृति और धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ तो किसान संगठित होकर बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अब किसान केवल फाइलों में चल रही प्रक्रिया और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे।

लालमाटी के किसान संजय चंद्रवंशी ने बताया कि क्षेत्र के किसान करीब 20 वर्षों से सिंचाई के लिए जलाशय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद आज तक कोई ठोस काम धरातल पर नजर नहीं आया।
उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधा के अभाव में किसानों की मेहनत और आर्थिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं। यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुआ तो किसान अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।

किसानों ने मांग की है कि मसानेटोंग और लालमाटी क्षेत्र में सिंचाई परियोजना के लिए तत्काल सर्वे कराया जाए। इसके बाद डीपीआर तैयार कर प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाए और निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
किसानों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और हजारों किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है।

किसानों का कहना है कि जिस किसान की मेहनत से अन्न उत्पादन होता है, वही किसान सिंचाई के लिए हर साल बारिश का इंतजार करने को मजबूर है। अब जरूरत आश्वासन देने की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की है।
किसानों ने स्पष्ट किया है कि तीन माह के भीतर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो मसानेटोंग और लालमाटी के किसान एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे। किसानों की मांग साफ है—फाइलों में नहीं, खेतों में पानी चाहिए।