सवाल पूछते ही डॉक्टर अभद्रता पर उतर आए, पत्रकारों ने कलेक्टर से की उच्चस्तरीय जांच की मांग,,, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान बर्दाश्त नहीं, कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
19 Jul, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिले में एक पत्रकार के साथ कथित अभद्रता और अपमानजनक भाषा के प्रयोग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वर्किंग जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन और पत्रकारों ने इसे केवल एक पत्रकार का नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समाज के सम्मान पर हमला बताते हुए शनिवार को कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर मयाराम कौल को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संघ व्यापक आंदोलन करेगा।
ज्ञापन के अनुसार, ग्राम बचोली निवासी एवं विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों से जुड़े पत्रकार अशोक गिरी गोस्वामी ने जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. शुभम लिल्हारे से एक समाचार के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी और उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क किया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान फोन डॉ. अशोक लिल्हारे को सौंप दिया गया। पत्रकार द्वारा समाचार से जुड़े सवाल पूछे जाने पर जवाब देने के बजाय उन्होंने कथित रूप से आक्रोशित होकर अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान पत्रकारों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और कथित रूप से यह भी कहा गया कि डॉक्टर होने के नाते किसी को भी पागल घोषित कर सकता हूं। इन आरोपों के सामने आने के बाद जिले के पत्रकारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
निजी अस्पताल से जुड़े सवाल पर विवाद....
पीडि़त पत्रकार अशोक गिरी गोस्वामी ने बताया कि 17 जुलाई की शाम उन्होंने एक समाचार के तथ्यात्मक सत्यापन और संबंधित पक्ष का मत जानने के उद्देश्य से जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. शुभम लिल्हारे को फोन किया था। हाल ही में एक निजी अस्पताल द्वारा जारी प्रेस नोट में डॉ. शुभम लिल्हारे का नाम डायरेक्टर के रूप में उल्लेखित था, वहीं एक मरीज ने भी दावा किया था कि उसकी सर्जरी उनके द्वारा की गई है। इन्हीं तथ्यों की पुष्टि के लिए उन्होंने सवाल किए। अशोक गिरी का आरोप है कि बातचीत के दौरान फोन डॉ. अशोक लिल्हारे को दे दिया गया, जिन्होंने सवालों का जवाब देने के बजाय कथित रूप से बेहद अभद्र, अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कहा गया, तेरे जैसे पत्रकार बहुत भौंकते हैं... तू पूछने वाला कौन होता है... तथा यह भी कहा गया कि मैं डॉक्टर हूं, किसी को भी पागल घोषित कर सकता हूं। अशोक गिरी का कहना है कि उन्होंने बार-बार अपना परिचय पत्रकार के रूप में देते हुए केवल तथ्यात्मक जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें लगातार अपमानित किया गया। उनका कहना है कि यह घटना केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान पर हमला नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ इस प्रकार का व्यवहार करने का दुस्साहस कोई न कर सके।
यह पूरे पत्रकार समाज का अपमान...
वर्किंग जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के जिलाध्यक्ष श्रीकांत त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई पत्रकार जनहित से जुड़े विषय पर तथ्य जानने के लिए सवाल पूछता है तो उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक का नाम निजी अस्पताल के डायरेक्टर के रूप में सामने आना भी गंभीर जांच का विषय है। संगठन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
पत्रकार संघ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोषी चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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