सरकारी संपत्ति पर डाका? सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर बिना नीलामी बिक्री के आरोप, जांच की उठी मांग।
12 Jul, 2026
13 व्यूज
सरकारी संपत्ति पर डाका?
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर बिना नीलामी बिक्री के आरोप, जांच की उठी मांग।
गुड़रूटोला श्मशान घाट से हटाया गया टिन सेट मात्र 2500 रुपये में बेचने की चर्चा, पंचायत नियमों की उड़ाई धज्जियां; 2025 में स्कूल डिस्मेंटल की सामग्री बेचने का मामला भी फिर सुर्खियों में।
नायक दर्पण/बालाघाट।
जनपद पंचायत बालाघाट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गुड़रू एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्राम गुड़रूटोला स्थित श्मशान घाट में लगे पुराने टिन सेट को हटाकर नया टिन लगाने की आड़ में पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और बिना नीलामी के बेच दिए जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि पंचायत के सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक ने सरकारी संपत्ति को नियमों को ताक पर रखकर मात्र 2500 रुपये में बेच दिया। इतना ही नहीं गांव में यह भी चर्चा है कि उक्त राशि का कोई लेखा-जोखा पंचायत के अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया और रकम का निजी उपयोग कर लिया गया।
विभागीय सूत्रों कि माने तो पंचायत की किसी भी सरकारी सामग्री को बेचने से पहले पंचायत अधिनियम और वित्तीय नियमों के तहत उसकी सूची तैयार करना, मूल्यांकन कराना, पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित करना तथा सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य होता है। लेकिन सूत्र का आरोप है कि इस पूरे मामले में ऐसी किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जिम्मेदारों ने मनमाने तरीके से सरकारी संपत्ति को बेचकर नियमों की खुली अवहेलना की।
सूत्रों के अनुसार श्मशान घाट में लगा टिन सेट पूरी तरह अनुपयोगी नहीं था। यदि उसे नीलामी के माध्यम से बेचा जाता तो पंचायत को अधिक राशि प्राप्त हो सकती थी। लेकिन कथित रूप से बिना किसी सूचना, बिना बोली और बिना रिकॉर्ड तैयार किए टिन बेच दिया गया। जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2025 में भी ग्राम के एक स्कूल भवन को डिस्मेंटल किया गया था। उस दौरान भवन से बड़ी मात्रा में लकड़ी, दरवाजे, खिड़कियां, टिन सहित अन्य उपयोगी सामग्री निकली थी। आरोप है कि उस समय भी पंचायत के जिम्मेदारों ने बिना नीलामी के उक्त सामग्री बेच दी थी। आज तक उस बिक्री से प्राप्त राशि का कोई सार्वजनिक हिसाब सामने नहीं आया। न तो ग्रामसभा में जानकारी दी गई और न ही पंचायत के अभिलेखों में पारदर्शी रूप से इसका उल्लेख किया गया।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्तियों को इसी तरह मनमाने ढंग से बेचा जाता रहा तो पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि पूरे गांव की संपत्ति होती है। इसलिए उसकी बिक्री भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।
सूत्रों ने और जागरूक ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि बिना नीलामी सरकारी सामग्री बेचने और राशि के गबन की पुष्टि होती है तो संबंधित सरपंच, सचिव एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा शासन को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई भी दोषियों से कराई जाए।
फिलहाल यह सभी आरोप स्थानीय सूत्रों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायतों में सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!