उकवा मॉयल में CSR के नाम पर सात करोड़ का घोटाला! बंसल ग्रुप का घटिया निर्माण, भ्रष्टाचार छुपाने को टिन से ढका रास्ता।
12 Jul, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिले के उकवा मॉयल क्षेत्र में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी सीएसआर के नाम पर लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से बन रहा स्कूल भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता जा रहा है। बंसल ग्रुप द्वारा संचालित इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता के हर मापदंड को ताक पर रखकर खुलेआम घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले नायक दर्पण ने इस घोटाले को उजागर किया था। जिसके बाद ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन ने मिलीभगत से निर्माण स्थल को टिन की दीवारों से घेरकर आम नागरिकों और पत्रकारों की पहुंच पूरी तरह बंद कर दी है। यह सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि जनता के पैसे और बच्चों के भविष्य के साथ घिनौना खिलवाड़ है।
पिछले समाचार प्रकाशन के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। उकवा मॉयल प्रबंधक और ठेकेदार अब खुलेआम भ्रष्टाचार को छुपाने में जुटे हुए हैं। निर्माण स्थल जाने वाले रास्ते को टिन से ढक दिया गया है ताकि कोई भी अंदर झांक न सके। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कैसे घटिया निर्माण, टूटे-फूटे कलाम और दीवारें इस महान (सीएसआर) परियोजना की हकीकत बयान कर रही है।
घटिया सामग्री का खुला खेल
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सूत्रों के अनुसार स्कूल भवन निर्माण में इस्तेमाल हो रही काली रेत, सीमेंट, सरिया और अन्य सामग्री पूरी तरह घटिया दर्जे की है। मानकों के अनुसार जो मोटाई और मजबूती होनी चाहिए। उसका कहीं नामोनिशान नहीं। दीवारें पतली, छत कमजोर और नींव में भी कंजूसी बरती जा रही है। ऐसा लगता है कि सात करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा ठेकेदार और कंपनी के मिले-जुले अधिकारियों की जेब में जा रहा है। (सीएसआर) के नाम पर कंपनियां सरकार और समाज को दिखावा करती हैं। लेकिन हकीकत में जनता का पैसा लूटने का यह नया तरीका बन गया है। उकवा मॉयल जैसे दूरदराज के इलाके में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का सपना इन भ्रष्ट तत्वों ने चूर-चूर कर दिया है।
पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब नायक दर्पण पत्र ने इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से उजागर किया तो बजाय सुधार के उल्टा ठेकेदार और प्रबंधन ने बचाव के तरीके निकाल लिए। अब निर्माण स्थल पर ताला-बंदी जैसा माहौल बना दिया गया है। कोई आम नागरिक या मीडिया कर्मी अंदर घुसने की कोशिश करे तो तुरंत झूठे मुकदमे और दबाव की धमकी दी जाती है। स्थानीय लोग भी अब डर के मारे इस तरफ आने से कतराते हैं।
प्रशासन कहां सो रहा है?
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यह सवाल हर जिम्मेदार नागरिक के मन में उठ रहा है। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और (सीएसआर) निगरानी समिति कहां है? सात करोड़ रुपये की परियोजना पर क्या कोई ऑडिट नहीं हो रहा? क्या कोई क्वालिटी चेक नहीं हो रहा? या फिर सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि निर्माण कार्य की निगरानी के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। जो थोड़ी-बहुत जांच पड़ताल होती भी है उसे ठेकेदार पहले से ही सूचित कर दिया जाता है। नतीजा? घटिया सामग्री को अच्छी दिखाने के लिए पुताई-पुताई कर दी जाती है और रिपोर्ट साफ निकल आती है। यह घोटाला केवल उकवा मॉयल तक सीमित नहीं है। पूरे बालाघाट जिले और मध्य प्रदेश में सीएसआर के नाम पर ऐसे कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं जहां विकास के नाम पर लूट मची हुई है। बंसल ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां सामाजिक जिम्मेदारी का ढोंग रचकर अपनी छवि चमकाती हैं. लेकिन मैदान में जाकर हकीकत कुछ और ही निकलती है।
बच्चों का भविष्य दांव पर
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स्कूल भवन अगर कमजोर सामग्री से बना तो बारिश में छत गिरेगी, दीवारें फटेंगी और बच्चों की जान को खतरा होगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत हर बच्चे को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का हक है लेकिन यहां तो बुनियादी ढांचा ही खोखला है।
नायक दर्पण इस मामले की लगातार निगरानी कर रहा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि तुरंत उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए। निर्माण कार्य को तत्काल रोककर स्वतंत्र एजेंसी से गुणवत्ता जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, प्रबंधक और संलिप्त अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। सात करोड़ रुपये का हिसाब जनता के सामने पेश किया जाए।
अगर आज नहीं तो कल इन भ्रष्ट तत्वों के खिलाफ आवाज उठानी ही पड़ेगी। सीएसआर का पैसा जनता का पैसा है। इसे लूटने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उकवा मॉयल के इस स्कूल भवन घोटाले को लेकर पूरे जिले में आक्रोश फैल रहा है। नायक दर्पण इस लड़ाई को तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती और बच्चों को उनका हक नहीं मिल जाता।
तस्वीरें स्पष्ट रूप से निर्माण स्थल की बदहाली और छुपाने की कोशिश को दर्शाती हैं। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
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