महान मेकओवर या भ्रष्टाचार पर परदेदारी का खेल..? काले कारनामे सफेदपोश मलाई का खेल...बाबूओं की टेबल पर धूल खाती शिकायत... दो-दो पद में रहने वाले की जांच अधर में लेकिन महान बनाने में जुटे जिम्मेदार...!
10 Jul, 2026
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सिवनी नायक दर्पण
यहाँ दो-दो पदों की मलाई काट रहे भूपेंद्र सिंह राजपूत के कारनामों की जांच की फाइल पर इतना भारी वजन रख दिया गया है कि महीनों बीत जाने के बाद भी वह एक इंच आगे नहीं खिसक पा रही है। शिकायतों के पुलिंदे अफसरों की मेज पर रखे-रखे सड़ रहे हैं लेकिन मजाल है कि किसी बाबू की कलम हिल जाए। आखिर जिला पंचायत सिवनी के अधिकारी-कर्मचारी ऐसी कौन सी मलाई के चक्कर में पड़े हैं जिसकी वजह से भूपेंद्र सिंह राजपूत के खिलाफ जांच करने में उनके पसीने छूट रहे हैं..?
लोकतंत्र का इससे बड़ा मजाक और क्या होगा..? जो व्यवस्था कल तक भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और नित-नए घोटालों की वजह से स्थानीय समाचार पत्रों की सुर्खियां बटोरती रही है वह आज अचानक व्यवस्था का आदर्श मॉडल बनकर प्रशस्ति पत्र थामे कैमरे के सामने दिख रहे है। इस चमचमाती और ढोंग से भरी तस्वीर को देखकर क्षेत्र की जनता अपनी आँखें मलने पर मजबूर है। जनता हैरान भी है और परेशान भी कि आखिर धनौरा को इस सम्मान के लिए चुनने वाला वो महानुभाव कौन है।
इस पूरे तमाशे का सबसे दिलचस्प और शर्मनाक पहलू यह है कि जो पदाधिकारी इस प्रशस्ति पत्र को सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं वे स्वयं भ्रष्टाचार के दलदल में गर्दन तक धँसे हैं। दो-दो पदों पर मलाई काट रहे और एक साथ काबिज भूपेंद्र सिंह राजपूत पर वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर कई गंभीर अनियमितताओं के संगीन आरोप हैं।
गजब की बात देखिए इनके खिलाफ की गई शिकायतों के पुलिंदे आज भी जिला पंचायत सिवनी के बाबूओं की टेबल पर धूल खा रहे हैं। उन फाइलों पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन साहेब के चेहरे पर सम्मान की चमक बिखेरने के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया गया।
जनता का सुलगता सवाल: एक उपलब्धि की आड़ में आखिर क्या छुपाने की कोशिश की जा रही है..? क्या यह प्रशस्ति पत्र दाग धोने वाला वाशिंग पाउडर है..? क्षेत्र में अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि इस कथित उपलब्धि की आड़ में आखिर किस अनियमितता को छुपाने की साजिश रची जा रही है..? क्या जिला पंचायत के जिम्मेदार की जुगलबंदी ने मिलकर यह पूरा स्वांग रचा है..?
जब तक भूपेंद्र सिंह राजपूत पर लगे वित्तीय घोटालों की जांच नहीं होती तब तक यह प्रशस्ति पत्र जनता की नजर में सिर्फ और सिर्फ एक कागजी तमाशा है। देखना यह है कि धूल खा रही शिकायतों की फाइलें कभी खुलती हैं या इस चमचमाते सर्टिफिकेट की रोशनी में सच को हमेशा के लिए दफन कर दिया जाएगा।
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