लाखों की मजदूरी भुगतान पर भी नही बनी गुणवत्ता अनुसार सड़क...सरपंच-सचिव ने नहीं ली इंजीनियर की सलाह ओर लीपापोती कर सड़क बना दी...इंजीनियर की अनुपस्थिति में सरपंच-सचिव का खेल...!

09 Jul, 2026 57 व्यूज
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​सिवनी नायक दर्पण

निर्माण के पहले सूचना पटल बिना लगाए निर्माण शुरू होते हैं ग्रामीण अंचलों में विकास कार्यो के नाम पर सरकारी बजट को बंदरवाट करने का खेल थमने का नाम नहीं लेता है। ताजा मामला जनपद पंचायत सिवनी के ग्राम पंचायत चीचबंद में सरपंच और सचिव की जुगलबंदी ने तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर सीसी (सीमेंट कंक्रीट) सड़क का निर्माण करा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी निर्माण प्रक्रिया से तकनीकी मार्गदर्शन देने वाले इंजीनियर (उपयंत्री) को पूरी तरह दूर रखा गया।

​बिना उचित प्रक्रिया और मापदंडों के आनन-फानन में बनाई गई इस सड़क की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, और सीधे तौर पर शासकीय राशि के दुरुपयोग की बू आ रही है। ​न रोलर चला, न वाइब्रेटर लगा; मुरुम बिछाकर डाल दिया मसाला मौके की स्थिति से साफ है कि सड़क निर्माण में तकनीकी कड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।

सीसी सड़क बनाने से पहले मुरुम डालकर उस पर रोलर चलाया जाना अनिवार्य है ताकि जमीन पूरी तरह बैठ जाए और भविष्य में सड़क न धंसे। इसके बाद कंक्रीट मिक्सर मशीन से मसाला डालने के दौरान वाइब्रेटर का उपयोग किया जाता है जिससे कंक्रीट के बीच के एयर गैप्स (हवा के बुलबुले) खत्म हो जाएं और सड़क में मजबूती से बने।

​जब इस मामले में जनपद पंचायत सिवनी के संबंधित इंजीनियर से बात की गई तो उनकी लाचारी और सिस्टम की पोल खुलकर सामने आ गई। इंजीनियर का कहना है कि वे केवल लेआउट (शुरुआती माप-जोख) के समय मौके पर गए थे। उसके बाद सरपंच और सचिव ने उन्हें निर्माण कार्य शुरू होने या जारी रहने की कोई सूचना नहीं दी।

जिस तकनीकी अधिकारी की देखरेख में निर्माण होना था, उसकी अनुपस्थिति में सरपंच-सचिव ने खुद को ही इंजीनियर मानकर सड़क कैसे तैयार कर दी...? क्या यह जानबूझकर किया गया ताकि घटिया निर्माण को कोई टोकने वाला न हो..?आखिर सरपंच और सचिव ने जनपद पंचायत के इंजीनियर की सलाह और तकनीकी गाइडलाइंस का उपयोग क्यों नहीं किया...? क्या इंजीनियर को न बुलाना और आनन-फानन में काम खत्म करना किसी बड़ी लीपापोती की नीयत से किया गया था।

लगभग 8 लाख की सड़क पर 1 लाख 62 हजार 600 की रूपये का मजदूरी भुगतान के बाद भी ना रोलर-वाइब्रेटर का उपयोग करना उचित नही समझा जो घटिया निर्माण की ओर ईशारा करता है।