कंडिका-43 और 46 की अनदेखी...नीति बन गई मजाक... प्रशासनिक लापरवाही बनी मिसाल...शासन से ऊपर कौन...? साठगांठ के चलते पिंजरा का का गेट नहींं खुला...शासन के आदेश रद्दी की टोकरी में...!

08 Jul, 2026 16 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनके कारण शासन के स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा? क्या सिवनी ग्रामीण यांत्रिक सेवा संभाग में शासन के आदेशों से ऊपर कोई अलग व्यवस्था काम कर रही है या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं..?

यदि कार्यमुक्ति में अनावश्यक देरी हुई है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि सिवनी में शासन के आदेश केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट स्थानांतरण आदेश को सिवनी ग्रामीण यांत्रिक सेवा संभाग ने खुलेआम ठेंगा दिखा दिया है। 16 जून 2026 को जारी आदेश के तहत राहुल रोकड़े को प्रशासकीय आधार पर छतरपुर ग्रामीण यांत्रिक सेवा संभाग में स्थानांतरित किया गया था लेकिन तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया।

विभागीय स्थानांतरण नीति की कंडिका-43 में साफ-साफ लिखा है कि संबंधित अधिकारी को दो सप्ताह के अंदर कार्यमुक्त किया जाना अनिवार्य है। कंडिका-46 में और भी कड़ा प्रावधान है समय-सीमा बीतने के बाद पुराने कार्यालय से वेतन देने की जिम्मेदारी कार्यालय प्रमुख और आहरण-संवितरण अधिकारी की होगी।

प्रशासनिक लापरवाही या जानबूझकर की गई साजिश...?
आदेश जारी होने के 22 दिन बाद भी राहुल रोकड़े सिवनी में ही तैनात दिख रहे हैं। सिवनी में नियमों का राज चलाने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा..? यदि इस बार भी आंखें मूंद ली गई तो साफ संदेश जाएगा कि मध्य प्रदेश में शासन के आदेश सिवनी जैसे जिलों में सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

आदेश बना मजाक स्थानांतरण के तीन सप्ताह बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त...शासन की समय-सीमा धरी रह गई..आखिर किसके संरक्षण में जमे हैं राहुल रोकड़े..जब आदेश का पालन ही नहीं तो स्थानांतरण नीति का औचित्य क्या...?