आदेश बना मजाक स्थानांतरण के तीन सप्ताह बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त...शासन की समय-सीमा धरी रह गई..आखिर किसके संरक्षण में जमे हैं..जब आदेश का पालन ही नहीं तो स्थानांतरण नीति का औचित्य क्या...?

07 Jul, 2026 180 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश सिवनी जनपद में सवालों के घेरे में आ गया है। पंचायत समन्वय अधिकारी विजय कुमार अवधिया का 16 जून 2026 को प्रशासकीय आधार पर जनपद पंचायत बुढार, जिला शहडोल स्थानांतरण किया गया था लेकिन आदेश जारी होने के लगभग तीन सप्ताह बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।

स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि स्थानांतरण नीति की कंडिका-43 के अनुसार संबंधित अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर कार्यमुक्त किया जाना अनिवार्य है। वहीं कंडिका-46 में यह भी प्रावधान है कि समय-सीमा के बाद वेतन पुराने कार्यालय से देय नहीं होगा और इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख एवं आहरण-संवितरण अधिकारी की होगी। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सिवनी जनपद में शासन के आदेशों से ऊपर कोई व्यवस्था काम कर रही है या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं..? यदि शासन की स्पष्ट समय-सीमा का पालन नहीं हो रहा, तो फिर स्थानांतरण नीति का औचित्य क्या रह जाता है..?

यह मामला केवल एक अधिकारी की कार्यमुक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि शासन के आदेशों की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है। यदि देरी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई होना आवश्यक है। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि शासन के आदेश सिवनी जनपद में केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।