​नायक दर्पण की खबर का असर। पंचायत भवन में जन्मदिन मनाने पर सचिव को थमाया नोटिस, सवालों के घेरे में जनपद सीईओ का नोटिस जवाब।

02 Jul, 2026 174 व्यूज
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नायक दर्पण/​बालाघाट।
जनपद पंचायत बालाघाट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लामता में पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा को तार-तार करने वाला एक शर्मनाक मामला सामने आया। सरकारी कार्यालय को निजी उत्सव का अड्डा बनाने की घटना नायक दर्पण पत्र द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और संबंधित सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। लेकिन इस नोटिस की भाषा और सीमित दायरे ने अब जनपद सीईओ की निष्पक्षता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​क्या था मामला?
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बीते 13 जून 2026 को ग्राम पंचायत लामता कार्यालय में जनकल्याण शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर की समाप्ति के बाद पंचायत सचिव ने सरकारी कार्यालय परिसर के भीतर ही अपने जन्मदिन का भव्य जश्न मनाया। इस दौरान न केवल कार्यालय की मर्यादा को ताक पर रखा गया। बल्कि केक पर मध्य प्रदेश पंचायत स्थानीय स्वशासन का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह (लोगो) भी उकेरा गया था। सबसे अधिक आपत्तिजनक यह रहा कि जिस केक को काटकर जन्मदिन मनाया गया उस पर सरकारी लोगो अंकित था जो सीधे तौर पर राजकीय प्रतीक के अपमान की श्रेणी में आता है।

​अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत या मूक सहमति?
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इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो इस बात के गवाह हैं कि जब सचिव सरकारी कार्यालय में जन्मदिन का जश्न मना रहे थे। तब वहां न केवल सरपंच, बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों के सचिव, जिला पंचायत सदस्य और जनपद पंचायत बालाघाट के कर्मचारी भी मौजूद थे। सरकारी कार्यालय को निजी आयोजन स्थल बनते देख किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई। यह मौन स्वीकृति इस बात को सिद्ध करती है कि वहां मौजूद सभी लोग इस अनुशासनहीनता में बराबर के सहभागी थे।

​सीईओ का नोटिस: अंधे को आई न आई या दोषियों को बचाने का प्रयास?
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नायक दर्पण कि टीम द्वारा मामले को जनपद सीईओ के संज्ञान में लाने के बाद सीईओ ने सचिव को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि इस नोटिस ने प्रशासन की मंशा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
​नोटिस में केवल सचिव को ही कटघरे में खड़ा किया गया है। जबकि फोटो और वीडियो में स्पष्ट रूप से अन्य कर्मचारी और जनप्रतिनिधि भी दिखाई दे रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि केक पर लगे सरकारी प्रतीक चिन्ह (लोगो) के अपमान का कोई जिक्र इस नोटिस में नहीं है। क्या प्रशासन का ध्यान इस गंभीर पहलू पर नहीं गया या जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है? स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि सीईओ का यह नोटिस सिर्फ खानापूर्ति है ताकि सचिव के साथ-साथ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बचाया जा सके।

सबसे ​बड़ा सवाल कार्यालय की गरिमा का क्या?
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सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए होते हैं न कि निजी उत्सवों के लिए। सरकारी लोगो वाले केक को काटकर सचिव ने विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। यदि जिम्मेदार अधिकारी ही विभाग की मर्यादा का मजाक उड़ाएंगे तो आम जनता का प्रशासन पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
​क्या केवल एक नोटिस देकर यह मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा? या फिर उन तमाम लोगों पर भी कार्रवाई होगी जो उस दौरान वहां मौजूद थे और तमाशबीन बने रहे? साथ ही सरकारी प्रतीक चिन्ह के अपमान के मामले में क्या कड़ी विधिक कार्यवाही की जाएगी? यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन नायक दर्पण पत्र इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा जब तक दोषियों पर उचित और सख्त दंडात्मक कार्यवाही नहीं हो जाती। बालाघाट जिले की जनता अब प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रही है।