मरने के बाद भी सम्मान नहीं...करोड़ों के विकास के दावे लेकिन खुले आसमान के नीचे होता है अंतिम संस्कार...बारिश हो या तेज धूप खुले में दी जाती है मुखाग्नि जिम्मेदार मौन...!

02 Jul, 2026 213 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण


जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत दिघोरी के ग्राम घोटी की तस्वीरें ग्रामीण विकास के दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। गांव में आज भी ऐसा सुविधायुक्त श्मशान घाट नहीं है जहां ग्रामीण अपने परिजनों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर सकें। मजबूरी में खुले मैदान में ही चिता सजाई जाती है। बारिश हो या तेज धूप, अंतिम संस्कार करने आए लोगों के लिए न शेड है न बैठने की व्यवस्था और न ही कोई बुनियादी सुविधा। मौके की तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि गांव में श्मशान घाट जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है। यह स्थिति तब है जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है।

विकास की प्राथमिकताएं आखिर तय कौन कर रहा है और ग्रामीणों की इस मूलभूत जरूरत को अब तक क्यों नजरअंदाज किया गया...?सरपंच का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, लेकिन पूरे कार्यकाल में गांव को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।


जब किसी ग्रामीण की अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंचती है। गांव में आज तक एक सुविधायुक्त श्मशान घाट तक उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे ही मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश हो या तेज धूप, अंतिम संस्कार के दौरान न तो बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार का शेड या आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

जब पंचायत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यो पर सरकारी धन खर्च होने के दावे किए जाते हैं, तब गांव आज तक श्मशान घाट जैसी मूलभूत सुविधा से क्यों वंचित है..? क्या इस आवश्यकता को कभी प्राथमिकता ही नहीं दी गई, या फिर योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही हुई..?