साहब हमारे गांव भी आ जाएं किस्मत बदल जाएगी...क्या विकास भी वीआईपी कार्यक्रम का मोहताज...जो सड़कें वर्षो तक बदहाल रहीं, वे कुछ दिनों में बन गई चकाचक... अब गांवों से उठी आवाज—मुख्यमंत्री हमारे यहां भी आइए..!

01 Jul, 2026 175 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर शहर में तैयारियां जोरों पर हैं। वर्षो से जर्जर और बदहाल पड़ी कई सड़कें अचानक मरम्मत और सौंदर्यीकरण के दौर से गुजर रही हैं। जिन रास्तों की ओर लंबे समय से किसी का ध्यान नहीं गया था वे भी अब तेजी से दुरुस्त किए जा रहे हैं। इससे शहरवासियों में खुशी तो है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर व्यंग्यात्मक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

गांवों में ऐसी कई सड़कें हैं, जिन पर बारिश के दिनों में निकलना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन उनकी ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के आने से शहर की वर्षो पुरानी समस्याएं कुछ ही दिनों में दूर हो सकती हैं तो फिर गांवों में भी उनका दौरा होना चाहिए। लोगों का कहना है कि शायद तब उनके गांवों की टूटी सड़कें बंद पड़ी नालियां, खराब पेयजल व्यवस्था और अन्य लंबित विकास कार्य भी प्राथमिकता में आ जाएं।

क्या विकास केवल वीआईपी दौरों तक सीमित रहना चाहिए या फिर आम दिनों में भी प्रशासन को समान संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। उनका मानना है कि गांवों की मूलभूत समस्याओं का समाधान किसी बड़े दौरे का इंतजार किए बिना नियमित रूप से होना चाहिए।

प्रशासन को शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में पूरे वर्ष समान संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। यदि किसी सड़क की मरम्मत आवश्यक है तो वह किसी विशेष दौरे का इंतजार क्यों करे..?मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियों के बीच उठे ये सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि विकास का पैमाना किसी वीआईपी कार्यक्रम से नहीं बल्कि आम नागरिक की जरूरतों से तय होना चाहिए।

टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हुई है कि "अगर मुख्यमंत्री हर गांव का दौरा करें, तो शायद पूरा जिला ही चकाचक हो जाए।"