कब्जा होता रहा जिम्मेदार सोते रहे.? नीलामी नहीं हुई...किसके इशारे पर शुरू हुआ कारोबार.? शिकायत के बाद बना जांच दल..सवालों के घेरे में ग्राम पंचायत,जनपद पंचायत का संरक्षण या मिलीभगत..! क्या जांच टीम औपचारिकता निभाई दुकानों को खाली करवाने में दिलचस्पी नहीं

30 Jun, 2026 222 व्यूज
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सिवनी/धनौरा नायक दर्पण

जनपद पंचायत धनौरा के ग्राम पंचायत धनौरा में सरकारी राशि से निर्मित 12 व्यावसायिक दुकानों की बिना नीलामी हुए दुकानों पर कब्जा हुआ दुकानों पर कब्जा होते रहे ओर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी की नजर नही पहुंची ना ही समय रहते कार्रवाई के लिए सक्रिय नहीं हुए। यह केवल लापरवाही थी या फिर कब्जाधारियों के प्रति मौन संरक्षण था।

शिकायत के बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया जांच के दौरान दुकान संचालित कर रही जांच टीम सबाल जबाब पर औपचारिक निभाई दुकान खाली नही कराई गई। दुकानों से तत्काल कब्जा हटाने की बात सामने नही आई। लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नियमों से बढ़कर कब्जाधारियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है..? जांच टीम को दुकान दिख रही तो दुकानों को खाली करवाने में दिलचस्पी क्यों नही ली। क्या कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगी...?

जनपद पंचायत धनौरा और ग्राम पंचायत धनौरा के अधिकारी-कर्मचारियों को सरकारी दुकानों पर हो रहा कब्जा पहले क्यों दिखाई नहीं दिया..? यदि कब्जा लंबे समय से था तो उसे रोकने या हटाने की पहल समय रहते क्यों नहीं की गई..? क्या यह केवल प्रशासनिक चूक थी या फिर किसी स्तर पर मौन सहमति अथवा संरक्षण भी था..?

दुकानों के आवंटन का नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली का भी है। आखिर बिना नीलामी और बिना वैधानिक प्रक्रिया के सरकारी दुकानों में कारोबार शुरू हो गया लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी..? यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं यह संरक्षण का कमाल है।