उकवा मॉयल में शिक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार का महल। करोड़ो के स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, नौनिहालों की जान से खिलवाड़।
25 Jun, 2026
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उकवा मॉयल में शिक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार का महल।
करोड़ो के स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, नौनिहालों की जान से खिलवाड़।
नायक दर्पण/बालाघाट। जिले की उकवा मॉयल में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी सीएसआर (CSR) के तहत लगभग सात करोड़ की लागत से बनने वाला स्कूल भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। बंसल ग्रुप द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मापदंडों को दरकिनार कर खुलेआम घटिया रेत और सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है।
हाथ लगाते ही झड़ रहा मसाला
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हालात इतने बदतर हैं कि बिना उचित तराई के पिलर और दीवारों का मसाला हाथ से ही झड़ रहा है। साइट पर ली गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कंक्रीट में भारी कमियां हैं और निर्माण कार्य बेहद कमजोर है। सवाल यह है कि जिस इमारत में भविष्य के कर्णधार यानी बच्चे शिक्षा ग्रहण करेंगे, क्या वह सुरक्षित है? इस घटिया निर्माण के कारण भविष्य में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
इंजीनियर और प्रबंधन की भूमिका पर सवाल
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निर्माण कार्य की निगरानी के लिए नियुक्त सिविल इंजीनियर अंकित निनावे और उकवा मॉयल प्रबंधक निषाद निकोसे की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। जब मीडिया ने इंजीनियर अंकित निनावे से सवाल किए, तो वे कैमरे के सामने तो कुछ भी कहने से बचते रहे, लेकिन दबी जुबान में घटिया निर्माण को 'गुणवत्तापूर्ण' और 'लैब टेस्ट' में सही होने का प्रमाणपत्र बांटते नजर आए। ठेकेदार का बचाव करना यह दर्शा रहा है कि कहीं न कहीं जिम्मेदारों की जेबें गर्म की गई हैं।
जिम्मेदार नदारद, निर्माण कार्य भगवान भरोसे
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मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि स्लैब ढलाई जैसा महत्वपूर्ण कार्य चल रहा था, लेकिन वहां मॉयल का एक भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। नियमतः इतने बड़े निर्माण में इंजीनियर की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन लगता है कि जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय ठेकेदार की 'नौकरी' बजाने में व्यस्त हैं।
बिल्डर को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
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स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि बंसल ग्रुप को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और इस घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय जांच हो। साथ ही, मॉयल प्रबंधन के दोषी अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर मृणाल मीना इस मामले को संज्ञान में लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं, या फिर यह भ्रष्टाचार का महल यूं ही बनकर तैयार हो जाएगा?
करोड़ों के बजट का आखिर गया कहां? क्या मॉयल प्रबंधन मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले बिल्डर को शह दे रहा है? प्रशासन को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की जरूरत है।
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