कागजों में लबालब..धरातल पर सूखा तालाब..बूंद भर पानी नहीं.लाखों का भुगतान गाइडलाइन दफन,कमीशनखोरी अमर..इंजीनियर अनाड़ी कमीशन के लालच में काला चश्मा पहनकर मूल्यांकन कर दिया..जिला पंचायत के जिम्मेदारों की टेबल पर शिकायत बनी शोभा ना जांच ना कार्यवाही..!

29 May, 2026 667 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत पीपरडाही में बना अमृत सरोवर तालाब अब विकास कम और भ्रष्टाचार कमीशनखोरी की निशानी की छाप छोड़ गया लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस तालाब की हकीकत धरातल पर ऐसी निकली कि आज उसमें बूंद भर पानी तक नहीं है। जिस उद्देश्य से तालाब निर्माण कराया गया था उसी उद्देश्य को जिम्मेदारों ने कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा दिया।

निर्माण कार्य में गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और शासन की गाइडलाइन को खुलेआम दफन कर दिया गया। कागजों में ऐसा विकास चमकाया गया मानो गांव में जल क्रांति आ गई हो, लेकिन जमीनी तस्वीर भ्रष्टाचार की पूरी पटकथा खोल रही है।इस मामले में ग्राम पंचायत पीपरडाही के सरपंच, सचिव, संबंधित इंजीनियर, एसडीओ, जनपद पंचायत सिवनी और जिला पंचायत सिवनी के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कई महीनों पहले जिला पंचायत में शिकायत होने के बावजूद आज तक न निष्पक्ष जांच हुई और न किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई।

आखिर जनपद और जिला पंचायत के इंजीनियर इतने अनाड़ी हैं कि उन्हें निर्माण की खामियां दिखाई नहीं दीं, या फिर कमीशन के चश्मे ने सब कुछ धुंधला कर दिया...? क्योंकि अगर ईमानदारी से मूल्यांकन हुआ होता तो करोड़ों योजनाओं का यह हाल नहीं होता।तालाब की सूखी तलहटी अब सरकारी राशि के बंदरबांट की कहानी बयान कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने विकास की जगह सिर्फ भुगतान बचाने और कमीशन की खेती करने में रुचि दिखाई।

निर्माण कार्य में नियमों को दरकिनार कर सिर्फ कमीशनखोरी की फसल काटी गई। यही वजह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी तालाब उपयोगिता साबित नहीं कर पाया।जनपद और जिला पंचायत के इंजीनियर इतने अनाड़ी हैं कि उन्हें निर्माण की खामियां दिखाई नहीं दीं, या फिर कमीशन के लालच में जिम्मेदारों ने “काला चश्मा” पहनकर मूल्यांकन कर दिया? क्योंकि यदि तकनीकी निरीक्षण ईमानदारी से हुआ होता, तो आज तालाब की यह दुर्दशा सामने नहीं आती।धरातल की तस्वीरें खुद सरकारी राशि के बंदरबांट की कहानी बयां कर रही हैं। तालाब में पानी नहीं, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप जरूर लबालब नजर आ रहे हैं।