पत्रकार निर्दोष अब झूठ फैलाने ओर प्रशासन का समय खराब करने वाले सरपंच संघ पर कार्रवाई कब..? पत्रकार को बदनाम कर भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने की रची साजिश...झूठे आरोपों की ढाल से भ्रष्टाचार पर पर्दा...!
13 May, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट
किरनापुर जनपद की ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं, भ्रष्टाचार अब नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। पंचायतों की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रही आवाजों के बीच अब सरपंच संघ खुद सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के एक पत्रकार पर झूठे आरोप लगाकर न केवल उसकी छवि खराब करने की कोशिश की गई बल्कि प्रशासन को भी गुमराह किया गया।
पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि जब पंचायतों में भ्रष्टाचार, अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगातार सामने आ रहे थे तभी अचानक पत्रकार पर आरोप लगाने का मामला सामने आना कई सवाल खड़े करता है। चर्चा यह भी है कि कहीं यह पूरा घटनाक्रम पंचायतों में चल रही कथित गड़बड़ियों से जनता और प्रशासन का ध्यान हटाने की रणनीति तो नहीं..?
बिना तथ्यों के किसी पत्रकार को निशाना बनाना लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जाएगा। आखिर प्रशासन का कीमती समय झूठे आरोपों और भ्रम फैलाने में क्यों बर्बाद किया गया..?
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि पंचायत स्तर पर लंबे समय से कई निर्माण कार्यो भुगतान और योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में जब पत्रकार इन मामलों को उजागर करने लगे तो उन पर दबाव बनाने और बदनाम करने की कोशिश शुरू हो गई।
लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच में यदि पत्रकार निर्दोष साबित हो चुके हैं तो फिर झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। प्रशासन ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करे जिन्होंने बिना प्रमाण प्रशासन को भ्रमित करने और एक पत्रकार की छवि खराब करने का प्रयास किया।
यदि सवाल उठाने वालों की आवाज दबाई गई तो पंचायतों में भ्रष्टाचार का खेल और मजबूत होगा। लोकतंत्र में पत्रकारिता को डराने या दबाने की कोशिश किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती।जिस दिन सवाल पूछने वाले खामोश हो जाएंगे उसी दिन लोकतंत्र मर जाएगा।
झूठे आरोपों की आड़ में भ्रष्टाचार बचाने का खेल
सरपंच संघ ने किया ऐसे गुमराह करने वाले संघ के उपर प्रशासन को कार्यवाही सुनिश्चित की जा चाहिए। सरपंच द्वारा अपने कारनामे को छुपाने के लिए पत्रकार को बदनाम कर पंचायत घोटालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई।
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