सरकार सो रही है, किसान जाग गए! 10 घंटे बिजली मांग पर किसान गर्जना संगठन ने आंदोलन का बिगुल फूंका!

16 Jan, 2026 54 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
प्रदेश के किसानों की समस्याएं दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं। खेती पूरी तरह मौसम और बिजली पर निर्भर है, लेकिन वर्तमान हालात में किसान खेत में खड़ा होकर भी असहाय नजर आ रहा है। बिजली की अनियमित और अपर्याप्त आपूर्ति ने सिंचाई व्यवस्था को चौपट कर दिया है। जिससे फसलें सूखने की कगार पर हैं और किसान कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। इसी गंभीर स्थिति को लेकर किसान गर्जना संगठन ने मुख्यमंत्री ऊर्जा मंत्री और विद्युत विभाग के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपते हुए प्रतिदिन कम से कम 10 घंटे निर्वाध विद्युत आपूर्ति की मांग की है।
किसान गर्जना संगठन का कहना है कि यह ज्ञापन किसी औपचारिक निवेदन का हिस्सा नहीं बल्कि प्रदेश के किसानों के धैर्य की अंतिम चेतावनी है। सरकार की ओर से भले ही बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं की जा रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अंधेरे में खेती करने को मजबूर है। जबकि खेतों में खड़ा किसान बिजली के इंतजार में रात-दिन परेशान हो रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि किसानों को रात के अंधेरे में अनिश्चित समय पर बिजली दी जा रही है। इससे न केवल किसानों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी जान भी खतरे में पड़ गई है। जंगली जानवरों, करंट से होने वाली दुर्घटनाएं, खेतों में हादसे और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी किसानों को यह महसूस कराती है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
किसान गर्जना संगठन ने स्पष्ट किया है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस निर्णय और तत्काल क्रियान्वयन की आवश्यकता है। संगठन की प्रमुख मांगों में प्रदेश के सभी किसानों को कृषि पंपों के लिए प्रतिदिन कम से कम 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति, बिजली की लिखित और सार्वजनिक समय-सारिणी जारी करना, सिंचाई सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की कटौती या ट्रिपिंग पर पूर्ण रोक, जले या खराब ट्रांसफार्मरों की 24 से 48 घंटे में मरम्मत, रात में बिजली लेने की मजबूरी खत्म करना और उच्च क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मरों की स्थापना शामिल है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में इन मांगों पर अमल नहीं किया गया तो प्रदेश भर में तहसील जिला और संभाग स्तर पर अनिश्चितकालीन धरना विद्युत विभाग व प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव प्रमुख मार्गों पर चक्का जाम और आवश्यकता पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक अव्यवस्था आर्थिक नुकसान या कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
किसान गर्जना संगठन का साफ कहना है कि बिजली किसानों का अधिकार है और इस अधिकार को लेकर किसान पीछे हटने वाला नहीं है। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक संघर्ष जारी रहेगा।