भ्रष्ट सरपंचो संघ की फर्जी शिकायत का पर्दाफाश: पत्रकार निर्दोष, पुलिस ने झूठे आरोपों को किया खारिज।
08 May, 2026
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भ्रष्ट सरपंचों का घिनौना चेहरा बेनकाब,पत्रकार संजय अजीत पर ब्लैकमेलिंग का झूठा इल्जाम पुलिस ने रौंद दिया।
नायक दर्पण/बालाघाट।
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जनता के पैसे लूटने वाले भ्रष्ट सरपंचों का गिरोह एक बार फिर नंगा हो गया। विकास कार्यों के नाम पर पंचायत फंड में मनमानी लूट मचाने वाले किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष प्रकाश बाहे और मडकापार के सरपंच प्रतिनिधि नंदकिशोर चंद्रवंशी समेत अन्य भ्रष्ट तत्वों ने नायक दर्पण अखबार के जिला ब्यूरो चीफ संजय अजीत सहित तीन साहसी पत्रकारों को ब्लैकमेलर, वसूलीखोर और फर्जी शिकायतकर्ता बताकर उनकी इज्जत और आजीविका पर हमला बोल दिया था। लेकिन किरनापुर पुलिस की निडर और बेदाग जांच ने इन भ्रष्ट सरपंचों की सारी चाल को धूल में मिला दिया। लगाए गए सभी गंभीर आरोप पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद, तथ्यहीन और बेहद घटिया बदले की भावना से भरे साबित हुए। पुलिस रिपोर्ट साफ चीख-चीखकर कह रही है कोई सबूत नहीं, कोई प्रमाण नहीं, सिर्फ झूठ और साजिश!
पुलिस ने खोल दी भ्रष्टाचार की पोल
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जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता प्रकाश बाहे, नंदकिशोर चंद्रवंशी और उनके साथियों से कड़ी पूछताछ की सभी पक्षों के बयान दर्ज किए गए। पर इन भ्रष्ट लोगों में से कोई भी CM हेल्पलाइन में दर्ज फर्जी शिकायत का एक भी दस्तावेज, एक्नॉलेजमेंट नंबर या स्क्रीनशॉट पेश नहीं कर सका। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट में सख्त शब्दों में लिखा गया है कि आरोप पूर्ण रूप से निराधार और आधारहीन हैं। शिकायत केवल आरोपों के सहारे टिकी थी कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। असल में संजय अजीत ने सुसवा, मडकापार और आसपास की पंचायतों में फंड की खुली लूट, ठेकेदार-सरपंचों के गठजोड़, अनियमित कार्यों और जनधन की बर्बादी की खबरें छापी थीं। इन्हीं खबरों ने इन लुटेरों के अवैध धंधे पर पानी फेर दिया। यही इनका सबसे बड़ा गुनाह था सच्चाई उजागर करना।
बदले की आग में की गई फर्जी शिकायत
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जब भ्रष्टाचार की पोल खुलने लगी तो ये सरपंच बौखला गए। उन्होंने पुलिस अधीक्षक और थाने में झूठी शिकायत देकर पत्रकार संजय अजीत को ब्लैकमेलर बताकर चुप कराने की नापाक कोशिश की। पुलिस जांच में साफ हो गया कि समाचार प्रकाशन से उत्पन्न गहरी रंजिश और व्यक्तिगत बदले की भावना के कारण यह फर्जी शिकायत तैयार की गई थी। न कोई ब्लैकमेलिंग, न कोई वसूली, न कोई सबूत। सिर्फ झूठ, फरेब और पत्रकारिता का गला घोंटने की साजिश। यह घटना ग्रामीण मध्यप्रदेश में स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ चल रहे सिस्टमैटिक उत्पीड़न की और एक काली मिसाल बन गई है।
संजय अजीत अब करेगा करारा पलटवार
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पुलिस द्वारा शिकायत पूरी तरह खारिज कर दिए जाने के बाद संजय अजीत ने सख्त रुख अपनाया है। वे सरपंच प्रकाश बाहे, सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी और अन्य भ्रष्ट सरपंच जो झूठी शिकायतकर्ताओ के खिलाफ मानहानि, झूठी शिकायत, प्रतिष्ठा हनन और साजिश का मुकदमा दायर करेंगे तथा भारी आर्थिक मुआवजे की मांग करेंगे। संजय अजीत का तीखा संदेश है भ्रष्टाचार और लूट की पोल खोलना मेरा धर्म है। जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने वालों को मैं चुपचाप नहीं देख सकता। झूठी शिकायतों से पत्रकारों को डराने वालों को कोर्ट में भी करारा जवाब मिलेगा।
पुलिस की निष्पक्षता की तारीफ
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इस पूरे प्रकरण में थाना किरनापुर पुलिस ने सराहनीय साहस दिखाया। सत्ता और स्थानीय दबाव के बावजूद पुलिस ने बिना किसी पक्षपात के जांच की और सच्चाई को सामने लाया। थाना प्रभारी की रिपोर्ट इन भ्रष्ट सरपंचों के लिए तमाचा है।
भ्रष्ट सरपंच संघ को आखिरी चेतावनी
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किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ अब आईना देख ले। जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने आए लोग अगर खुद भ्रष्टाचार के गैंग चला रहे हैं और सच्चे पत्रकारों को ब्लैकमेलर बताकर बदनाम कर रहे हैं तो यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। विकास के नाम पर लूट बंद करें, नहीं तो जनता और कानून दोनों इनके खिलाफ खड़े हो जाएंगे।
सच्चाई की ताकत हमेशा झूठ और भ्रष्टाचार से बड़ी होती है। संजय अजीत जैसे निडर पत्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की रक्षा कर रहे हैं। भ्रष्ट सरपंचों की यह शर्मनाक पराजय स्वतंत्र पत्रकारिता की ऐतिहासिक जीत है।
अब कोर्ट इन लुटेरों को कितनी बड़ी सजा देता है, यह देखना बाकी है। लेकिन एक बात पक्की है पत्रकारिता का गला घोंटने की कोशिश करने वाले खुद गला घुटकर रह जाएंगे।
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