किसान स्लाट बुकिंग के लिए परेशान...रसूखदारों का बिना स्लाट बुकिंग तौला जा रहा गेहूं...किसानों से 25/- से 30/-रुपए तो व्यापारियों से 50/- से 60/- रुपए प्रति क्विंटल ले रहे दलाली...50.200 से 50.500 की जगह 51.200 की हो रही तुलाई...!

24 Apr, 2026 248 व्यूज
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सिवनी/धूमा नायक दर्पण

सिवनी जिले के धूमा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत दो केन्द्र बनाए गए हैं। जिसमें में एक केन्द्र धूमा मोहगांव में तो गेहूं खरीदी का कार्य जारी है। तो वहीं किसान स्लाट बुकिंग के लिए परेशान हो रहे हैं, तो वहीं जिन किसानों के स्लाट बुक होकर गेंहू की तुलाई हो चुकी है उनकी गेंहू पोर्टल पर बिना पैसे लिए दर्ज नहीं की जा रही है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति धूमा के प्रबंधक व खरीदी प्रभारी की सहपर इनके सहयोगी कर्मचारियों द्वारा किसानों से 25/- से 30/- रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे मांगे जा रहे है .. नहीं देने पर किसानों को सर्वर नहीं चल रहा का बहाना बताकर कई दिनों तक परेशान किया जा रहा है। मजबूर बेबस किसान नहीं चाहते हुए भी नाजायज पैसे देने मजबूर हैं। तो वहीं व्यापारियों से 50/- से 60/- रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से तुलाई की दलाली सेटिंग हो जाने से उनकी गेंहू की तुलाई और पोर्टल पर दर्ज की प्रक्रिया बड़ी आसानी से जारी है। व्यापारियों के लिए सर्वर प्रोब्लम जैसी कोई समस्या नहीं है। चना मसूर जैसे अनाज की तुलाई में किसानों के बायोमेट्रिक मशीन से अंगूठा लगवाए जा रहे हैं। यदि यही सिस्टम गेहूं की तुलाई में भी किया जाए तो कुछ हद तक भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकता है। तो साथ ही मिली जानकारी के मुताबिक खरीदी केंद्र में बिना स्लाट बुकिंग हुए रसूखदारों का गेहूं की तुलाई की जा रही है। तो वही एक और खरीदी केंद्र में खरीदी प्रभारी की लापरवाही से गेहूं की तुलाई नहीं होने से किसान परेशान हो रहे हैं। किसानो की गेहूं की तुलाई नहीं होने से किसानअपनी गेहूं की रखवाली के लिए दो- चार दिनों से धर्म कांटा के नीचे बैठकर समय बिता रहे हैं। उपार्जन केंद्र पर गेहूं की तुलाई 51.200 की ली जा रही है। और तुलाई के बाद बोरी सिलाई के पहले शेष अधिक अनाज निकाल लिया जाता है। इसके पहले भी ऐसे ही मामले पर धूमा थाने पर एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है। परन्तु इसके बावजूद खरीदी केंद्र की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों को सौंपी जा रही है।
जिम्मेदार अधिकारी यदि मौके पर आकर निष्पक्ष निरीक्षण करते हैं तो भ्रष्टाचार की और भी कई गम्भीर बातें उजागर हो जाएंगी । परन्तु पिछले वर्षों में देखा गया है कि उपार्जन केंद्रों में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की बातें उजागर होने के बावजूद जांच अधिकारी ले- देकर मामले को रफा दफा करते आए हैं।
ऐसी स्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था भी कटघरे में है! तो वहीं अपने कर्तव्य पर निष्ठावान निष्पक्ष पूर्व जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना की भांति नवांगतुक सिवनी कलेक्टर महोदया गेहूं उपार्जन केंद्रों पर हो रही धांधली पर गम्भीरता दिखाती है और निष्पक्ष कार्रवाई करती हैं। तो भ्रष्टाचार के दम पर सरकार के खजाने में सेंधमारी लगाने वाले कई नकाबपोश खरीदी प्रभारी कटघरे में खड़े मिलेंगे।