बुजुर्ग महिला तपती धूप में बेसहारा भटकती रही सामाजिक न्याय विभाग कुर्सी तक सीमित... इंसानियत को झकझोरती तस्वीर

28 Mar, 2026 486 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

क्या बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित है..?क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी...?क्या इस महिला को आश्रय और सहायता मिलेगी या मामला यूं ही दब जाएगा...?

यह घटना सीधे तौर पर सरकार और जिम्मेदार विभागों पर सवाल खड़े करती है। क्या सामाजिक न्याय विभाग की योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं...? क्या जमीनी स्तर पर इनका कोई अस्तित्व ही नहीं...?

NGO और प्रशासन की निष्क्रियता भी इस मामले में साफ दिखाई देती है। जहां जरूरत है तत्काल मदद और आश्रय की वहां सिर्फ उदासीनता नजर आती है।

सिवनी से सामने आई यह तस्वीर समाज की संवेदनहीनता पर सीधा तमाचा है। जहां एक ओर लोग मां की पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक बुजुर्ग महिला सड़क पर बेसहारा हालत में जिंदगी ढोने को मजबूर है।
बताया जा रहा है कि करीब 80 वर्ष की यह वृद्ध महिला चिलचिलाती धूप में अपने सामान को घसीटते हुए बरघाट रोड पर भटकती नजर आई। न सिर पर छत न खाने का ठिकाना—बस लाचारी और बेबसी का दर्द।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सामाजिक न्याय विभाग और जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां हैं...? क्या ऐसे बुजुर्गों के लिए बनी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं...? क्या इन्हें चिन्हित कर आश्रय गृह तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं...?स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे मामलों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि व्यवस्था की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण बन जाएगी।

क्या प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर बुजुर्ग महिला को सहारा देगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा...?