मडकापार सड़क घोटाला: आदेश के 32 दिन बाद जागी जांच टीम, अब सच या लिपापोती पर टिकी जनता की नजर।
26 Mar, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिले की जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मडकापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ चुका है। शासन के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर-फावड़ा के जरिए कराए गए निर्माण कार्य ने पूरे मामले को घोटाले का रूप दे दिया है। हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले को उजागर करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में बनी हुई है।
इस पूरे मामले को सबसे पहले नायक दर्पण की टीम ने उजागर किया था। समाचार प्रकाशन के माध्यम से यह तथ्य सामने लाया गया कि सुदूर सड़क निर्माण जैसे कार्य जो कि श्रमप्रधान योजना के अंतर्गत आते हैं,उनमें भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। यह सीधे-सीधे शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। क्योंकि इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना होता है। न कि मशीनों के माध्यम से काम पूरा करना।
समाचार के प्रकाशन के बाद 13 फरवरी 2026 को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त जांच के आदेश जारी किए गए थे। आदेश जारी होने के बाद उम्मीद थी कि मामले में त्वरित कार्रवाई होगी और दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट दिखाई दी।
आदेश जारी होने के बावजूद पूरे 32 दिनों तक जांच फाइलों में ही दबी रही। न कोई जांच टीम मौके पर पहुंची और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई देखने को मिली। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं मामले को दबाने की कोशिश की जा रही थी। जब इस निष्क्रियता को लेकर नायक दर्पण द्वारा पुनः समाचार प्रकाशित किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए गए तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और जब जाकर बुधवार को आखिरकार जांच टीम ग्राम पंचायत मडकापार पहुंची। टीम ने मौके का निरीक्षण किया। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी या फिर इसे भी अन्य मामलों की तरह कागजी खानापूर्ति बनाकर बंद कर दिया जाएगा?
स्थानीय लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार निर्माण कार्य में खुलेआम जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर फावड़ा का उपयोग किया गया है। कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। जिनमें स्पष्ट रूप से मशीनों के जरिए सड़क निर्माण होते हुए देखा जा सकता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं। तो कार्रवाई में देरी क्यों?
मामले को और अधिक संवेदनशील बनाता है विभागीय सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी। सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत मडकापार के सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी का परिवार प्रशासनिक व्यवस्था में प्रभावशाली स्थिति में है। बताया जा रहा है कि उनकी पुत्री तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। जबकि पुत्र सहकारिता विस्तार अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
यदि यह जानकारी सही है तो यह संदेह और भी गहरा हो जाता है कि कहीं इस प्रभाव के चलते जांच को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की जा रही। प्रशासनिक तंत्र में पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों का प्रभाव पड़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि क्या इस मामले में वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर जांच को लंबा खींचकर अंततः लीपापोती कर दी जाएगी। जागरूक ग्रामीणों में चर्चा है कि यदि इतने स्पष्ट साक्ष्यों के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होती तो यह भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देने जैसा होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां शासन पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है। वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में देरी और निष्क्रियता आम जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
अब सभी की निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यह रिपोर्ट न केवल इस मामले का भविष्य तय करेगी। बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि प्रशासन वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ कितना गंभीर है।
यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होती है। तो निश्चित ही दोषियों पर कार्रवाई होगी और एक मजबूत संदेश जाएगा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन यदि जांच में लीपापोती की गई तो यह मामला प्रशासन की साख पर एक बड़ा दाग बन जाएगा।
नायक दर्पण इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी हर पहलू को उजागर करता रहेगा। अब देखना यह है कि यह जांच न्याय दिलाती है या फिर सिस्टम की मिलीभगत का एक और उदाहरण बनकर रह जाती है।
सवाल सीधा है क्या मडकापार सड़क घोटाले में सच सामने आएगा। या फिर सत्ता और संबंधों की धूल में दब जाएगा?
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