विकास की बातें बड़ी, हकीकत में अधूरा! विधायक जी के वादों का हाल भीकेवाड़ा भवन बना खामोश गवाह।
13 Mar, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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आठ साल हो गए, आठ लंबे, धूल भरे, जुमलों से सने साल! भीकेवाड़ा का सामुदायिक भवन आज भी उसी अधूरे सपने की तरह खड़ा है न दीवारें पूरी, न छत, न इंसाफ। बस एक पट्टिका है, जो चीख-चीखकर कह रही है। यहाँ 2018 में मधु भगत जी ने भूमिपूजन किया था और फिर सब भूल गए! विधायक मधु भगत साहब अब तो आपकी कुर्सी फिर से मजबूत हो गई है,सत्ता का स्वाद फिर से जीभ पर है, लेकिन भीकेवाड़ा के लोगों की पीड़ा पर आपकी आँखें अभी भी बंद क्यों हैं? क्या सत्ता मिलते ही इंसानियत और वादे दोनों कूड़े में फेंक दिए जाते हैं आपके यहां? पहले चुनाव में हाथ जोड़कर वोट मांगे, आंसू बहाए, सपने बेचे। हारे तो गायब। फिर 2023 में वही ड्रामा दोहराया भवन बनेगा, गांव तरक्की करेगा और जीत गए। अब? अब भी वही पुरानी रिकॉर्ड फाइल पर काम चल रहा है, बजट आने वाला है, जल्द शुरू होगा। कितने जल्द और कितने साहब सुनकर थक गए हैं ये गरीब लोग? यह कोई सामुदायिक भवन नहीं यह आपकी राजनीतिक झूठ का जीता-जागता सबूत है! सात-आठ साल में एक–एक ईंट गलने भी लगी, लेकिन तीन-तीन बार चुनावी कमाई हो गई। पहली बार भूमिपूजन से वोट, दूसरी बार हार के बहाने चुप्पी, तीसरी बार दोबारा वादे से जीत। अब चौथी बार क्या प्लान है? अगले चुनाव तक इंतजार? या फिर नया जुमला तैयार कर रहे हैं। अबकी बार भवन जरूर बनेगा या?
ग्रामीण नाम ना छापने के शर्त में कह रहे हैं विधायक साहब चुनाव के समय तो हमारा बेटा, हमारा भाई बन जाते हैं, लेकिन जीत के बाद कौन भीकेवाड़ा? वाला रवैया। महिलाएं तिरपाल के नीचे ब्याह कर रही हैं, बुजुर्ग खुले आसमान तले ग्राम सभा और अन्य कार्यक्रम कर रहे हैं, और कह रहे हैं हमारी जिंदगी में विकास नहीं सिर्फ धोखा है। और आप? आप फोटो सेशन में व्यस्त, शिलान्यास की पट्टिकाओं पर नाम चमकाते हुए, लेकिन असली काम? जीरो! शून्य! न के बराबर!
राजनीतिक जानकार हंसते हुए कह रहे हैं यदि विधायक मधु भगत में जरा सी भी ईमानदारी बाकी होती, तो यह भवन तीन साल में बन जाता। लेकिन यहां तो फाइलें सड़ रही हैं, बजट कागजों में फंसा है, और इच्छाशक्ति? वो तो जन्म से गायब है! यह लापरवाही नहीं यह सुनियोजित धोखाधड़ी है। जनता के पैसे से खेलना वोट की दुकानदारी करना और फिर मुंह छिपाना यह सब अब खुलेआम हो रहा है। अब ग्रामीणों का सब्र टूट रहा है। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग सब एक सुर में चिल्ला रहे हैं, अब जुमले नहीं काम चाहिए! यदि जल्द से जल्द निर्माण शुरू नहीं हुआ, समयबद्ध प्लान नहीं आया तो यह अधूरा भवन आपकी राजनीतिक कब्र बनेगा। हर दिन वो पट्टिका चीखेगी यहां विधायक मधु भगत ने सपने बेचे थे, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं किया! सवाल अब बहुत सीधा है मधु भगत जी आप विधायक हैं या सिर्फ वोट चोर? विकास का नाटक कब तक चलेगा? भीकेवाड़ा के लोगों से शर्मिंदगी महसूस नहीं होती? या आपका दिल पत्थर का है, जो ग्रामीणों की तकलीफ देखकर भी नहीं पिघलता? समय आ गया है जवाबदेही का। या तो तुरंत काम शुरू करो ग्रामीणों के सामने आकर माफी मांगो और प्लान बताओ। वरना याद रखो जनता सब देख रही है, सब याद रख रही है। यह अधूरा भवन आपकी सबसे बड़ी नाकामी नहीं, आपकी सबसे काली करतूत का प्रतीक बन चुका है। भीकेवाड़ा अब नहीं मानेगा। अब जुमलों का जवाब सिर्फ आंदोलन से देगा। विकास दिखाओ या फिर चुपचाप स्वीकार कर लो कि जिसके नाम पर सिर्फ पट्टिकाएं लगती हैं, काम कभी नहीं होता!
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