सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ किसान खुद पहुंचा जनसुनवाई बोला “सर, मैं जिंदा हूं... 13 आवेदन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन...

12 Mar, 2026 37 व्यूज
Main Photo
छिंदवाड़ा नायक दर्पण

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सरकारी सिस्टम की चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है, जहां एक जीवित किसान को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। हालत यह है कि किसान पिछले चार साल से अधिकारियों के सामने गुहार लगाते हुए यह साबित करने में लगा है कि वह जिंदा है।
मामला छिंदवाड़ा जिले की चांद तहसील के ग्राम पतलोन का है। यहां के निवासी किसान ब्रेतना यादव को सरकारी कागजों में मृत दर्ज कर दिया गया। इस गलती का सीधा असर उनके जीवन पर पड़ा और उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलना बंद हो गया।
किसान ब्रेतना यादव के अनुसार वर्ष 2022 तक उनके खाते में किसान सम्मान निधि की राशि नियमित रूप से आती थी। लेकिन अचानक राशि आना बंद हो गई। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझा और स्थानीय अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन जब दस्तावेज निकलवाए गए तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
ब्रेतना यादव का कहना है कि पिछले चार वर्षों में वह करीब 13 बार तहसील और संबंधित विभागों में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। लगातार अनदेखी से परेशान होकर वह मंगलवार को जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए कहा, “सर, मैं जिंदा हूं।”
करीब सवा एकड़ कृषि भूमि के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले इस किसान के लिए किसान सम्मान निधि बड़ी आर्थिक सहायता थी। लेकिन कागजी लापरवाही के कारण यह सहारा भी छिन गया।
जनसुनवाई में शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मामले की जांच कर जल्द ही रिकॉर्ड में सुधार करने और किसान को बकाया राशि दिलाने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि चार साल से “जिंदा होने का सबूत” दे रहे इस किसान को आखिर कब न्याय मिलता है।