शिकायतें पहुंचीं,खबरें छपी फिर भी कार्रवाई का पत्ता नहीं हिला... कमीशन के “गांधी छाप कागज” के आगे क्या नियम बौने पड़ गए…?जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ बंधे हैं या आंखों पर पट्टी…?शासन की राशि पर डाका यह कैसा पंचायत राज…?

11 Mar, 2026 644 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण


जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत जमुनिया (बकोड़ी) में सरपंच मालती जंघेला ने खुद लाड़ली बहना योजना का लाभ लिया जब कि ग्राम पंचायत में सरपंच का इसलिए जिता लाया जाता है कि ग्राम का विकास ओर जरूरतों तो लाभ दिलाईगी लेकिन यहाँ पर सचिव जयकुमार अरेवा ने नियमों की धज्जियां उड़ा कर सरपंच मालती जंघेला को लाभ दिया गया। जबकि शासन की गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि जनप्रतिनिधियों को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता फिर लाभ लिया
इससे अंदाज लागया जा सकता है कि ग्राम का विकास कैसा होगा।

शिकायतें जिला पंचायत, जनपद पंचायत और महिला बाल विकास विभाग तक पहुंच चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर खबरें प्रकाशित होने के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना साठगांठ की ओर ईशारा करता है।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और कार्रवाई में देरी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। आखिर ऐसा क्या है कि लगातार शिकायतों और खुलासों के बाद भी जांच और कार्रवाई की गति बेहद धीमी है।

क्या वाकई सिस्टम बेबस है या फिर “गांधी छाप कागज” की ताकत इतनी ज्यादा हो गई है कि नियम-कानून भी उसके आगे झुक जाते हैं…?जहाँ सरपंच खुद शासन की राशि हजम कर रही, वहाँ ग्रामीणों के हित की उम्मीद कैसे…?

सरपंच ही योजनाओं की रकम निगल जाए तो ग्रामीणों का भला कौन करेगा…?सरपंच-सचिव की जोड़ी पर मेहरबानी, जिम्मेदार अधिकारी खामोश क्यों…?

अपने फायदा के लिए घटिया निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं। जब रखवाला ही बन जाए हिस्सेदार…पंचायत का मुखिया गांव के विकास का पहरेदार होता है, लेकिन अगर वही योजनाओं की राशि में हिस्सेदारी करने लगे तो गरीब और जरूरतमंदों का हक कौन बचाएगा…? यही सवाल आज ग्रामीणों के मन में गूंज रहा है।सरपंच-सचिव का खेल या सिस्टम की चुप्पी…? योजनाओं की राशि पर डाका, जिम्मेदारों की कार्रवाई गायब....!