गढ़वाल संस्कृति दर्पण स्मारिका 2026 का हुआ विमोचन, युवाओं को संस्कृति से जोड़ने की पहल।
08 Mar, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
गढ़वाल समाज की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरकारी सेवा में कार्यरत युवक किशोर दिनेवार द्वारा लिखित “गढ़वाल संस्कृति दर्पण स्मारिका 2026” का विधिवत विमोचन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं गणमान्यजनों के हाथों किया गया। इस अवसर पर समाजजनों ने इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
करीब 71 पृष्ठों की इस स्मारिका का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समाज और आने वाली युवा पीढ़ी को गढ़वाल समाज की भाषा, पहचान, इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है। स्मारिका के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले समाज के लोगों को आपसी संवाद और विचारों के जरिए एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है।
स्मारिका में राष्ट्रीय अध्यक्ष के विचार, वर्तमान कार्यकारिणी की जानकारी, समाज की उत्पत्ति, रहन-सहन, आचार-विचार, पारंपरिक पहनावा, व्यवसाय और रिश्तेदारी की परंपराओं को विस्तार से शामिल किया गया है। इसके अलावा समाज के प्रेरणादायी युवाओं के विचार, गढ़वाली भाषा के प्रयोग और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का विशेष प्रयास भी किया गया है।
पुस्तक में समाज के वरिष्ठजनों के शुभकामना संदेशों के साथ-साथ समाज के लिए विशेष योगदान देने वाले महानुभावों और समाज के ‘हीरो’ को भी स्थान दिया गया है। साथ ही लघुकथाएं, समधी-सजन मिलन गीत, सामाजिक धरोहर स्मारक भवन, स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी तथा समय-समय पर आयोजित होने वाली गढ़वाली स्लोगन प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों का भी समावेश किया गया है।
इसके अतिरिक्त स्मारिका में नशामुक्त समाज में नारी शक्ति की भूमिका, समाज की संरचना, वर्तमान चुनौतियां, विवाह संस्कृति में बदलाव और उसके समाधान, एकता की शक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं “मोरी संस्कृति मोरी धरोहर”, गढ़कलश योजना, बच्चों की उपलब्धियां, प्रेरणा गीत और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को भी स्थान दिया गया है।
बताया जाता है कि इस स्मारिका को तैयार करने के लिए किशोर दिनेवार ने समाज की बारीक जानकारियां जुटाईं और देश-प्रदेश में रहने वाले समाजजनों से संपर्क कर सामग्री एकत्र की। सरकारी नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद समय निकालकर यह कार्य करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने समाज के लिए समर्पित भाव से इस कार्य को पूरा किया।
विशेष बात यह भी है कि महंगाई के इस दौर में किशोर दिनेवार ने अपने निजी खर्च तथा समाज के अंशदान से इस पुस्तक का प्रकाशन कराया। समाजजनों का कहना है कि यह प्रयास उनके समर्पण, साहस और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उल्लेखनीय है कि किशोर दिनेवार अपने निजी कार्यों के बाद अधिकांश समय सामाजिक कार्यों में देते हैं। इसी सक्रियता के चलते उन्हें राष्ट्रीय गढ़वाल समाज महासभा द्वारा कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और वर्तमान में वे युवा राष्ट्र प्रकोष्ठ के संरक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
समाज के वरिष्ठजनों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह स्मारिका गढ़वाल समाज को एक सूत्र में पिरोने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। आधुनिक दौर में जब युवा सोशल मीडिया और रील्स की दुनिया में अधिक व्यस्त हो रहे हैं, ऐसे समय में संस्कृति और पहचान को सहेजने की यह पहल बेहद प्रेरणादायक मानी जा रही है।
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