82.70 लाख की क्षति का जिम्मेदार कौन अधिकारी नेता या ठेकेदार...? बस स्टैंड की 10 दुकानों का खेल नियमों को ताक पर रखकर किसने कराई बंदरबांट...?EOW की एफआईआर से सियासत में भूचाल...

07 Mar, 2026 218 व्यूज
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लखनादौन/सिवनी नायक दर्पण

लखनादौन नगर परिषद इन दिनों भ्रष्टाचार के एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। बस स्टैंड परिसर में दुकानों के आवंटन को लेकर सामने आए लगभग 82.70 लाख रुपये के कथित राजस्व नुकसान के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने प्रकरण क्रमांक 43/2026 दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद की राजनीति और प्रशासन दोनों में हड़कंप मच गया है।
EOW की जांच के अनुसार वर्ष 2020 की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि 13 दुकानों का पूर्ण भुगतान लिए बिना ही कब्जा सौंप दिया गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई। इसके साथ ही आरक्षित (ST) श्रेणी की दुकान क्रमांक 7 के आवंटन में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया है। मामले में 23 लोगों को आरोपी बनाते हुए आईपीसी की धारा 409 (अमानत में खयानत), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई के बीच नगर परिषद अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी ने कहा है कि यह निविदा प्रक्रिया उनके कार्यकाल की नहीं है और नियमों का सत्यापन करना प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व होता है। उन्होंने दावा किया कि ST वर्ग के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि नियमों के तहत प्रीमियम जमा कराकर स्थल परिवर्तन किया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एक डिफाल्टर ठेकेदार अपनी कमियों को छिपाने के लिए दुर्भावनापूर्ण शिकायतें कर रहा है।
वहीं पूर्व सीएमओ गीता वाल्मीकि ने भी इस पूरे मामले को भू-माफियाओं का प्रतिशोध बताते हुए कहा कि अवैध कॉलोनियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
इधर शहर में चर्चा केवल वर्तमान मामले तक सीमित नहीं है। पूर्व परिषद के दौरान हुए कथित घोटालों और अतिक्रमणों की भी जांच की मांग तेज हो गई है। बस स्टैंड कॉम्प्लेक्स को जर्जर बताकर तोड़ने और नई दुकानों की कथित बंदरबांट, नाले की जमीन पर निर्माण और निम्न गुणवत्ता के निर्माण कार्यों को लेकर जनता प्रशासन से जवाब मांग रही है।
अब सबकी नजर EOW की जांच पर टिकी है। शहर के लोग चाहते हैं कि इस मामले में “दूध का दूध और पानी का पानी” हो और चाहे वर्तमान हो या पूर्व पदाधिकारी—अगर दोषी हैं तो कानून सबके लिए बराबर साबित हो।