CEO सराफ का तानाशाही अंदाज! अमार्यादित बर्ताव के आरोपों से भड़के कर्मचारी, लगे नारे सराफ हटाओ, सम्मान बचाओ!
02 Mar, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ नीचले अधिकारी-कर्मचारियों में फूंटा आक्रोश प्रशासनिक असहमति नहीं बल्कि कार्यसंस्कृति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। हड़ताल के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मेहनतकश अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप भी चिंताजनक हैं। यदि सचमुच देर रात तक अनावश्यक बैठकों का दबाव, अमर्यादित व्यवहार, वेतन कटौती की धमकी और नियमों के विपरीत आदेशों का सिलसिला चल रहा है, तो यह किसी भी लोकतांत्रिक प्रशासन के लिए शर्मनाक स्थिति है।
सरकारी कर्मचारी मशीन नहीं होते वे भी सामाजिक और पारिवारिक दायित्व निभाने वाले इंसान हैं। विशेषकर महिला कर्मचारियों को देर रात तक बैठकों में बांधकर रखना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। योजनाओं की प्रगति के नाम पर भय और दबाव की संस्कृति थोपना प्रशासनिक दक्षता नहीं बल्कि तानाशाही मानसिकता को दशार्ता है। प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा या सीएम हेल्पलाइन जैसे विषयों पर लक्ष्य आधारित दबाव बनाकर जिम्मेदारी नीचे के कर्मचारियों पर थोप देना नेतृत्व नहीं कहलाता। नेतृत्व वह है जो टीम के साथ खड़ा हो न कि उसे कटघरे में खड़ा करे। यदि जिला पंचायत में सम्मानजनक कार्य वातावरण बहाल नहीं हुआ। तो यह आक्रोश व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।
दरअसल ऐसा इसलिये कहा जा रहा है कि क्योकि इन दिनो प्रशासनिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के कथित अमर्यादित और दमनकारी रवैये के खिलाफ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। कर्मचारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए जनपद कार्यालय के सामने हड़ताल प्रदर्शन शुरू कर दिया है। और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला पंचायत सीईओ नही हटाये गये तो पूरा पंचायत महकमा सामूहिक अवकाश पर चला जायेगा।
यहां जनपद सीईओ व अन्य पंचायत कर्मचारियों ने बताया कि जिला पंचायत सीईओर अभिषेक सराफ द्वारा अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य कराए जा रहे हैं और बैठक के नाम पर प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 8-9 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्य संस्कृति न केवल अमानवीय है। बल्कि शासकीय नियमों के भी विपरीत है। उन्होंने बैठकों को कार्यालयीन समय में साप्ताहिक आधार पर आयोजित करने की मांग उठाई है। आरोप यह भी है कि योजनाओं की दैनिक प्रगति के नाम पर वेतन कटौती की जा रही है। आकस्मिक अवकाश तक में अनावश्यक हस्तक्षेप हो रहा है और नियमों के विपरीत आदेश देकर बाद में उन्हीं मामलों में पंचायतों को नोटिस थमाए जा रहे हैं। स्थानांतरण पर रोक के बावजूद सचिवों व अन्य कर्मचारियों को जबरन इधर-उधर भेजने के आदेशों ने असंतोष को और भड़का दिया है। इसके अलावा अपूर्ण प्रधानमंत्री आवास, सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों को हर हाल में बंद कराने का दबाव और मनरेगा में मांग आधारित व्यवस्था के बावजूद लक्ष्य थोपने जैसे आरोपों ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। कर्मचारियों ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो सामूहिक अवकाश की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। जिला पंचायत में पनप रहा यह असंतोष अब प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वही पंचायत महकमे ने जिला पंचायत सीईओ को तत्काल हटाने की मांग रखी है। उन्होने तय किया है कि जब तक जिला पंचायत सीईओ नही हटाये जाते तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर नही लौटेगा।
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